देवदरी आते-जाते लतीफ़ शाह बाँध पानी, ताड़ के पेड़ों और नीची पहाड़ियों का खुला, शांत नज़ारा देता है, जो घाटी के घिरे माहौल से बिल्कुल अलग है। इसके पास उस सूफ़ी संत की दरगाह है जिनके नाम पर इसका नाम पड़ा।
एक नज़र में
| निर्माण पूरा | 1921 |
|---|---|
| नदी | कर्मनाशा |
| उद्देश्य | मुख्य रूप से सिंचाई और पीने का पानी |
| स्थान | चकिया के पास, ज़िला चंदौली |
| मुग़लसराय (DDU) से | लगभग 38 किमी |
| वाराणसी हवाई अड्डे से | लगभग 83 किमी |
बाँध
चंदौली ज़िले की वेबसाइट लतीफ़ शाह बाँध को भारत के सबसे पुराने बाँधों में से एक बताती है। कर्मनाशा नदी पर 1921 में बने इस बाँध के जलाशय का पानी मुख्य रूप से सिंचाई और पीने के लिए उपयोग होता है। ज़िला पर्यटन पोर्टल इसे पिकनिक स्थल के रूप में दर्ज करता है। आसपास का इलाका खुला और हरा-भरा है, किनारों पर ताड़ के पेड़ और क्षितिज पर पहाड़ियाँ।
बरसात में बाँध से गिरता पानी
साल के ज़्यादातर समय लतीफ़ शाह एक शांत, चौड़ा जलाशय रहता है। कैमूर की पहाड़ियों में भारी बारिश के बाद यह लबालब भर जाता है और कर्मनाशा पुरानी बाँध की दीवार के ऊपर से बहने लगती है, पानी का सफ़ेद पर्दा लगभग 10 से 20 फ़ुट नीचे नदी में गिरता है। तब यह अपने आप में एक मौसमी जलप्रपात बन जाता है और बरसात के सप्ताहांत में भीड़ खींचता है। ऐसा केवल लगातार भारी बारिश के बाद होता है, इसलिए सिर्फ़ यह नज़ारा देखने जाने से पहले स्थानीय रूप से पूछ लें।
इस पृष्ठ के ऊपर की फ़ोटो में बाँध से पानी बहता दिख रहा है (फ़ोटो सौजन्य: चंदौली पर्यटन)। लोग बहते पानी में सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, पर हम ऐसा करने की सलाह नहीं देते।
इसे किनारों से या किसी सुरक्षित जगह से देखें। बाँध के ऊपरी हिस्से पर न चलें और स्पिलवे की धारा में न खड़े हों: बहाव दिखने से कहीं ज़्यादा तेज़ होता है और ऊपर बारिश होने पर पानी जल्दी बढ़ सकता है।


लतीफ़ शाह का मज़ार
ज़िले की वेबसाइट के अनुसार पास का मज़ार सूफ़ी संत हज़रत लतीफ़ शाह बीर रहमतुल्लाह का है, जो चकिया से लगभग 3 किमी दूर है। यह कई धर्मों के लोगों की आस्था का स्थान है। शालीन कपड़े पहनें, जहाँ कहा जाए वहाँ जूते उतारें, और नमाज़ के समय सम्मान बनाए रखें।
कैसे पहुँचें
चकिया पहुँचें (टैक्सी से, या ज़िले के सुझाव के अनुसार मुग़लसराय से शेयर्ड जीप से), फिर थोड़ी दूर बाँध और मज़ार तक जाएँ। समय हो तो यह देवदरी की एक दिन की सैर में आसानी से जुड़ जाता है। देखें एक दिन का कार्यक्रम।
सुझाव
- बरसात में जब बाँध से पानी बह रहा हो, तो बाँध के ऊपरी हिस्से और स्पिलवे से दूर रहें।
- जलाशय में न तैरें, और जहाँ अनुमति न हो वहाँ बाँध के ढाँचे पर न चलें।
- देर दोपहर पानी पर पड़ती रोशनी फ़ोटो के लिए बहुत सुंदर होती है।
- उ.प्र. इको-टूरिज़्म बोर्ड इलाके में लतीफ़ शाह वन विश्राम गृह बताता है (बुकिंग वन विभाग से)।