चकिया का काली मंदिर (ज़िले की सूची में चकिया काली माता मंदिर) पीढ़ियों से स्थानीय आस्था का केंद्र रहा है। अगर आप देवदरी जाते हुए चकिया से गुज़रते हैं, तो यहाँ रुकना आसान है और यहाँ का माहौल भी ख़ास है।
मंदिर के बारे में
- चंदौली पर्यटन पोर्टल के अनुसार यह ज़िला मुख्यालय से लगभग 20 किमी दूर है, और यहाँ सैकड़ों वर्षों से माँ काली की पूजा होती आई है।
- मंदिर परिसर में लगभग दो बीघे में फैला एक बड़ा तालाब है, जिसमें मछलियाँ हैं।
- कुछ विवरणों के अनुसार मंदिर का निर्माण बनारस राज्य के शासकों ने करवाया था; हम इसकी तारीख़ की पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
त्योहार और मेले
- रामनवमी: सबसे बड़ा आयोजन, जिसमें तीन दिन तक दिन-रात सांस्कृतिक कार्यक्रम और रात्रि जागरण होते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
- मौनी अमावस्या: बड़ा मेला; ज़िला पोर्टल के अनुसार बलुआ घाट के मेले के बाद लोग यहाँ आते हैं।
- जन्माष्टमी: ज़िले भर में मटकी-फोड़ कार्यक्रम होते हैं।
- कबड्डी: पोर्टल एक प्रतियोगिता का ज़िक्र करता है जिसमें लगभग 8–10 ज़िलों से खिलाड़ी आते हैं।
त्योहारों के समय यहाँ की दुकानों पर माला, फूल, लकड़ी के खिलौने, लड्डू, जलेबी और मूँगफली बिकती है।
दर्शन के सुझाव
- शालीन कपड़े पहनें और गर्भगृह में जाने से पहले जूते उतारें।
- मंदिर के अंदर या पूजा-अनुष्ठान के दौरान फ़ोटो लेने से पहले पूछ लें।
- त्योहार के दिनों में भीड़ रहती है, इसलिए चकिया में ट्रैफ़िक धीमा मिलेगा; देवदरी की यात्रा उसी हिसाब से तय करें।
कैसे पहुँचें
मंदिर चकिया क्षेत्र में राजदरी–देवदरी जलप्रपात के आम रास्ते पर है। देखें चकिया से कैसे पहुँचें।