देवदरी सुकून से समय बिताने की जगह है। यहाँ करने को ज़्यादातर चीज़ें सीधी-सादी हैं: देखना, सुनना, थोड़ा पैदल चलना, फ़ोटो लेना और जंगल का आनंद उठाना। यही सादगी इसकी ख़ूबी है।
1. व्यू पॉइंट से जलप्रपात देखें
देवदरी का सबसे ख़ास अनुभव है घाटी के ऊपरी किनारे पर खड़े होकर नीचे गिरते पानी को देखना, दोनों ओर परतदार चट्टानों के बीच। यहाँ कुछ देर रुकें; बादल चलने, चट्टानों पर रोशनी बदलने और नीचे पक्षियों के चक्कर लगाने से नज़ारा बदलता रहता है। तय व्यू पॉइंट का उपयोग करें और बिना घेराबंदी वाले किनारों से काफ़ी दूर रहें।
2. फ़ोटोग्राफ़ी
देवदरी हर मौसम में फ़ोटोग्राफ़रों को कुछ नया देता है: बरसात में गरजता भूरा पानी और फुहारें, सर्दियों में साफ़ कुंड और लंबी छायाएँ, वसंत में सुनहरा जंगल। घाटी के लिए वाइड लेंस और चट्टानों पर पक्षियों के लिए ज़ूम लेंस साथ रखें। हमारे फ़ोटोग्राफ़ी सुझाव में रोशनी, फुहारों और ड्रोन की जानकारी है।
3. पक्षी और वन्यजीव दर्शन
चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य में लगभग 150 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज हैं। उ.प्र. इको-टूरिज़्म बोर्ड के अनुसार देवदरी की चट्टानों की दरारों में गिद्धों की बस्ती है, इसलिए दूरबीन से चट्टानों को ध्यान से देखें। अभयारण्य में दर्ज पक्षियों में मोर, तोते, बुलबुल, मैना, चील और कोयल शामिल हैं। चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर और सियार जैसे बड़े जानवर सुबह और शाम दिखने की ज़्यादा संभावना होती है।
- दूरबीन साथ लाएँ और धीमी आवाज़ में बात करें।
- केवल अनुमति वाली जगहों से देखें; जानवरों के पीछे कभी जंगल में न जाएँ।
- बंदरों समेत किसी भी जानवर को कभी न खिलाएँ।
4. अनुमति वाले रास्तों पर प्रकृति की सैर
जलप्रपात के पास बने रास्तों पर छोटी सैर से जंगल को क़रीब से देखने का मौक़ा मिलता है: पेड़ों की छाल, जंगली फूल, तितलियाँ और मौसमी धाराएँ। लंबे जंगली रास्तों के लिए स्थानीय अनुमति और बेहतर हो तो स्थानीय गाइड चाहिए; अकेले रास्ते से हटकर न जाएँ। देखें स्थानीय गाइड।
5. राजदरी भी देखें
राजदरी जलप्रपात उसी अभयारण्य में थोड़ी दूरी पर है, एक चौड़ा, सीढ़ीदार झरना जो देवदरी के घाटी में गिरने से बिल्कुल अलग लगता है। बहुत से लोग एक ही यात्रा में दोनों देखते हैं।
6. पिकनिक, जहाँ अनुमति हो
परिवार लंबे समय से घर का बना खाना लेकर यहाँ दिन बिताने आते रहे हैं। जाँच लें कि जिस जगह आप हैं वहाँ खाने की अनुमति है या नहीं, किनारों और पानी से दूर बैठें, और कचरे का हर टुकड़ा वापस ले जाएँ। खाने-पीने के सुझाव खाना और रेस्टोरेंट पर हैं।
7. आसपास के स्थल जोड़ें
- लतीफ़ शाह बाँध: चकिया के पास 1921 में बना जलाशय, और पास में सूफ़ी संत लतीफ़ शाह का मज़ार।
- चकिया काली मंदिर: माँ काली का पुराना मंदिर, जहाँ रामनवमी पर ख़ास रौनक़ रहती है।
- चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य: पूरा जंगल, उसका इतिहास और वन्यजीव।
क्या न करें
कभी नहीं
तेज़ धारा में तैरना, छलाँग लगाना या उतरना; सेल्फ़ी के लिए गीली चट्टानों या किनारों पर चढ़ना; रास्ते से हटकर जंगल में जाना; जानवरों को खिलाना; कचरा छोड़ना।
कृपया बचें
तेज़ संगीत और स्पीकर, वन विभाग की अनुमति के बिना ड्रोन, ऐसी प्लास्टिक थैलियाँ और बोतलें जिन्हें आप वापस न ले जाएँ, और तूफ़ान के समय जाना।
पूरी जानकारी: सुरक्षा और नियम।